उत्तर प्रदेश काडर की आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष चुनाव होने जा रहे हैं। दिव्या ने इस्तीफा देने के बावत जो पत्र सोशल मीडिया पर डाला है उससे सहज ही ये अनुमान लगाया जा सकता है कि उसके पीछे जनप्रतिनिधियों के दबाव की पृष्ठभूमि ज़रुर है। इस सिलसिले में उनकी जनप्रतिनिधियों से गाहे-बगाहे विवाद भी सुर्खियों में रहे हैं।
लंदन से अपनी अच्छी ख़ासी नौकरी को छोड़कर दिव्या देश में आईएएस की ओर इसलिए बढ़ी थी क्योंकि वह जानती थी कि किसी जिले का डीएम चाहे तो बहुत सी समस्याएं अपने विवेक का इस्तेमाल कर ठीक कर सकता है उसने देवरिया और मिर्जापुर में डीएम रहते जनहितैषी कई काम किए।जिसकी गवाही वहां के लोग बराबर देते रहे हैं।
पानी की समस्या हल करने पर एक वृद्ध माता ने जब दिव्या के सर पर आशीर्वाद का हाथ रखा था तो उसे जो सुकून मिला था वह उसका सबसे बड़ा सम्मान था। लोगों के अपरिमित स्नेह का जलवा मैडम के स्थानांतरण के समय देखा जा सकता है।
लेकिन जनप्रतिनिधियों के व्यवहार में उनके प्रति भावनाएं अच्छी नहीं रहीं। इसलिए उन्हें अपने जीवन के तकरीबन दस साल लूप लाइन में काटने पड़े। एक जनप्रिय जिलाधीश को इस तरह काम से रोका गया जिससे उनके देशसेवा के सपने टूटने लगे। दिल में कसक उठी और उन्होंने इस्तीफा देने का मन बना लिया। आईएएस दिव्या मित्तल वर्तमान में लखनऊ में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।
बाढ़ प्रभावित इलाके में तपती धूप के बीच निरीक्षण करते हुए आईएएस दिव्या मित्तल का एक वीडियो इस समय खूब वायरल हुआ था। वीडियो में जब धूप से बचने की बात हुई तो उनका बेफिक्र अंदाज सामने आया—‘अरे यार, धूप ही तो है, पिघल थोड़ी जाएंगे…’। अब उनका यही चर्चित वीडियो एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है। दिव्या मित्तल का आईएएस सेवा से इस्तीफा देने के बाद लोग उन्हें इस तरह भी याद कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि डीएम पद पर रहते हुए उन्होंने यह भी महसूस किया कि आईएस अधिकारी को अनपढ़ जनप्रतिनिधि कठपुतली की तरह नचाते रहते हैं। उनके कामों में अड़ंगा डालते हैं तथा हां मैं हां ना मिलाने पर स्थानांतरित कर दिया जाता है।यह लावा संभवत: बहुत दिनों से अंदर अंदर धधक रहा था उसी का अंजाम है यह त्यागपत्र।
भाजपा शासन के कार्यकाल में ही कई अधिकारी इस तरह इस्तीफा दे चुके हैं। लेकिन इस सरकार पर कोई असर नहीं है। उन्होंने एक काम शुरू कर दिया है कि बैकडोर से बिना आईएएस एग्जाम पास किए लोगों को एंट्री देना। जिससे उनके अपने मनपसंद लोगों के प्रवेश का रास्ता खुल गया है। यह अफसोसनाक है। इस पर इन अधिकारियों के संगठन ने कभी ऐतराज नहीं किया। फलस्वरूप यह दबाव झेलने वे मज़बूर हैं।
बधाई है, दिव्या जी को जिन्होंने अपनी कर्तव्य-परायणता के साथ बदसलूकी करने वाले जनप्रतिनिधियों को आईना दिखाया है।
लोग जानते हैं कि प्रधानमंत्री से लेकर एक पार्षद और सरपंच को सारी योजनाएं बनाकर यही लोग सुविचारित रुप से देते हैं। जब अनपढ़ या गैर समझदार हावी होने लगता है तो ऐसे हालात बनते हैं। जनप्रतिनिधि सुझाव दें उसकी जांच पड़ताल के बाद अधिकारी को उचित लगे तो राशि जुटाने में मदद करें। वह समझदार मीडिएटर की भांति आपके साथ है। उसका अनादर उचित नहीं।
उसे नौकर समझना उसका अपमान है। देश की प्रजातांत्रिक प्रणाली को मज़बूती देने वाले ये अधिकारी इस तरह की घटनाओं से परेशान हैं।यह शर्मिंदगी की बात है।
दिव्या मित्तल का वह एक लघु पत्र संस्कारी भाषा में इस सत्य को सामने ला रहा है जिससे आईएएस लाबी परेशान हैं। बेहतर हो यह लाबी अपने सवालों को भी उठाए वरना देश के कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी यूं ही इस्तीफा देते रहेंगे।
कहा ये जा रहा है कि राहुल गांधी से मिलने के बाद दिव्या ने त्यागपत्र दिया है यदि यह सच है तो स्वागतेय है।आज ऐसे सुलझे कर्मठ जनप्रतिनिधियों की ज़रुरत है।
(सुसंस्कृति परिहार एक्टिविस्ट और टिप्पणीकार हैं।)